कब लगेगी लगाम ?
इन झूठ आधारित ख़बरों से हो रही आम जनता की मानसिक यातना से छुटकारा कब ?
भारत का आम
नागरिक यह अपेक्षा करता है कि उसे सत्य आधारित समाचार मिले |
यह उसका हक़ भी है |
कुछ समय पहले कुछ पेपर आधी अधूरी खबर छापते थे या फिर किसी खास खबर को कुछ समाचार
पत्र अपनी पालिसी के तहत स्थान ही नहीं देते थे |
फिर एक दौर ऐसा आया की खबर छपती तो जरूर थी पर तोड़ मरोड़ कर ,यहाँ तक की प्रेस
कांफेरेंस में प्राप्त उत्तरों में से खबर बनाने के लिए कुछ समाचार पत्र अपनी
कल्पना शक्ति का उपयोग करके उसका अर्थ वैसे ही निकालते थे जैसी समाचार पत्र की पालिसी
कहती थी |
हाल के कुछ
दिनों में जनता के सामने समाचार पेश करने
का तरीका बदल छुका है और आजकल टी॰वी॰,इलेक्ट्रोनिक मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में
शुद्ध झूठी व किसी चर्चित व्यक्ति द्वारा स्वयं पैदा की गयी खबर का खूब प्रचार प्रसार
हो जाता है और बाद में पकडे जाने पर चुपचाप गलती मान या चुप रह कर ऐसे गलत प्रचार के दोष से खबर बनाने वाले साफ बच
जाते है |
26/11 का
हमला फिर सुर्खियों मे आ गया है,
जब से हेडली के बयान अमेरिका से वाया विडियो हो रहे है तब से ही देश का सारा
मीडिया उसके बयान को रिपोर्ट कर रहा है |
सरकारी वकील उज्ज्वल निकम जिन्होने 26/11
के केस को कसाब की फांसी तक पहुंचाया वो अब हेडली से सच उगलवाने मे कामयाब हो रहे
है | हेडली भी बिना
लाग लपेट के व बिना खौफ के जवाब दे रहा है। 26/11 की पूरी साजिश का पर्दाफ़ाश कोर्ट
मे केस चला तब ही हो गया था व आरोप साबित हो गए तभी तो हाइ कोर्ट,सूप्रीम
कोर्ट व अंत मे राष्ट्रपति तक की गई मर्सी पिटिशन खारिज होना इस बात का पूरा
प्रमाण है की साजिश पाकिस्तान मे रची गई और लश्कर ए तौबा मुखिया हाफिज़ सईद और
कमांडर जाकिर रेहमान लकवी ने पाकिस्तान की गुप्तचर एजेन्सी आईएसआई के सक्रिय सहयोग
से रची गई थी ।
हेडली
अमेरिका की जेल मे 35 साल की सजा भुगत रहा है और जेल से ही विडियो कोंफेरेंस के
मार्फत ब्यान दे रहा है।उसने बताया की वह
कई बार पाकिस्तान से भारत आया,उनकी
दो बार हमले की कोशिश असफल रही व तीसरी बार कामयाबी मिली ।उसने आतंकवादियों के चयन
से उनके प्रशिक्षण तथा उन्हे हथियार मुहैया करने से रेकी करने की पूरी जानकारी
देने व हमले के दौरान हंडलेर तक के खुलासे किए है |
इस संबंध
मे सहारा इंडिया,लखनऊ के अज़ीज़ बर्नी ने 26/11 के हमले पर लिखे अपने लेखों को संकलन
कर 6 डिसेम्बर 2010 को एक पुस्तक प्रकाशित की थी जिसका नाम था “26/11:आरएसएस की
साजिश ”।इस पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम
बड़े पैमाने पर किया गया जिसमे विशेष रूप से कांग्रेस के महामंत्री दिग्विजय सिंह
को आमंत्रित किया गया ,उनके
साथ मशहूर फिल्मी हस्ती महेश भट्ट व अन्य लोग मौजूद थे |
इस
कार्यक्र्म मे दिग्विजय सिंह ने कहा की उनके पास महाराष्ट्र के एटीएस चीफ़ हेमंत करकरे का 26/11 को हमले के दो घंटे
पहले फोन आया था और करकरे ने उन्हे बताया था कि उनकी जान जोखिम में है क्योंकि
मालेगांव ब्लास्ट के हिन्दू कट्टरपंथियों व आरोपियों की तरफ से उन्हे लगातार
धमकियाँ मिल रही है |
कुछ दिनों बाद उन्होने इंडियन
एक्सप्रेस को दुबारा यही बात बतायी जिससे एक राष्ट्रीय चर्चा शुरू हो गई। हेमत
करकरे की पत्नी ने दिग्विजयसिंह पर आरोप लगाया कि वे उनके पति की मौत को लेकर
राजनीति कर रहे है | ऐसा सुनकर दिग्विजय तुरंत पलट गए और ब्यान दिया की हेमंत
करकरे ने उन्हे फोन नहीं किया था बल्कि उन्होने हेमंत करकरे को फोन किया था। परंतु
बीएसएनएल 12 महीने से ज्यादा पुराना डाटा नहीं रखते इसलिए उनके लिए इस कॉल का
रेकॉर्ड दिखाना संभव नहीं है |
उक्त
पुस्तक में अज़ीज़ बर्नी ने लिखा कि हेमंत करकरे मालेगांव ब्लास्ट के बारे मे बड़े
खुलासे करने वाले थे जिससे बड़े बड़े हिन्दू साधू व संतों की पोल खुल जाती, इसलिए
संघ परिवार ने अमेरिका की गुप्त एजेंसी सीआईए व सऊदी अरबिया की मोस्साद से मिलकर 26/11 की साजिश रची |
पुलिस ऑफिसर करकरे एके 47 की गोली से नहीं मरे बल्कि महाराष्ट्र पुलिस मे
हिंदुवादी पुलिस अफसरों के सर्विस रिवॉल्वर से मार दिये गए |
इसमे कार्य में गैंगस्टर छोटा राजन का भी हाथ है |
पुस्तक मे
आगे लिखा कि आरएसएस के इन्द्रेश कुमार ने पाकिस्तान के आईएसआई से ऐसी कारवाई के
लिए 3 करोड़ रुपए लिए थे ,और उसी दिन करकरे को धमकी भरा फोन आया व दूसरे दिन उन्हे
मार दिया गया |
बजरंग दल बम्ब बनाने की ट्रेनिंग देता है ,प्रवीण
तोगड़िया के पैसों से हथियार उपलब्ध कराये जाते है |यहाँ
तक कहा गया की बजरंग दल का कोड नाम है इंडियन मुजाहिदीन |
कोम्युनालिस्म कोम्बाट की संपादक तीस्ता सेतलवाड ने एक रिपोर्ट मे लिखा कि
सीबीआई हिन्दू आतंकवाद को छुपा रही है और
दिल्ली मे बाटला हाउस की मुठभेड़ फर्जी थी |
बर्नी ने पुस्तक मे लिखा की भारत की सेना व पुलिस की मानसिकता मुस्लिम विरोधी है |
करीब 100 से
ज्यादा हिंदुत्ववादी संगठन जिनका संबंध
आरएसएस से है वो हिंसा के कार्यों मे लगे हुये है |
इसलिए चुनाव आयोग को बीजेपी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और बीजेपी को चुनाव लड़ने से
रोकना चाहिए |
इस पुस्तक
के प्रकाशन को लेकर जब एक विनायक जोशी ने नवी मुंबई की एक कोर्ट मे एक केस अज़ीज़
बर्नी के खिलाफ किया तो तुरंत बर्नी ने 28 जनवरी 2011 को फ़ैक्स के माध्यम से
विनायक जोशी को भेजे अपने पत्र मे माफी मांगते हुये और आगे से इस तरह से नहीं
लिखने का वादा करते हुये आरएसएस से गुजारिश की कि उनके काम मे बाधा आ रही है और
उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए कोर्ट केस वापस ले लिया जाय | बर्नी ने अपने माफीनामे में लिखा कि उनका इरादा
किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था व उनका इरादा भारत की सुरक्षा संगठनों
/एजेंसीयो अथवा देशभक्त संगठनो को निशाना बनाना नहीं था आदि आदि |
संघ ने बर्नी की माफी को खारिज किया
और कोर्ट केस यथावत रखा |
अब डेविड हेडली के बयान से एक बार
फिर पुष्टि हो रही है कि 26/11 की साजिश पाकिस्तान में रची गयी और इससे आरएसएस का
कोई लेना देना नहीं है |
इस सारे
वाकिए से लगता है कि भारत मे बोलने की आज़ादी कुछ ज्यादा ही मिली हुई है | कोई भी
व्यक्ति किसी भी के खिलाफ कुछ भी आरोप लगा सकता है और पकड़े जाने पर माफी मांग कर
निकल जाओ नीति के तहत बच निकलने में रहता है |
भले ही राष्ट्र को हानि हो,लोगों
की भावनाए भड़के और हिंसा ज़ोर पकड़े ,लिखने वाले की बला से |
चिंता का
विषय यह है की कि क्या ऐसी हरकतों से भारत
कभी उभर पायेगा ?
क्या कोई अलग से कानून नहीं बनना चाहिए,जिसमे पर केवल झूठ को आधार बना कर रची गई
खबर का पर्दाफाश होने पर कड़ी सजा का प्रावधान हो?
आजकल झूठ आधारित खबरों की जैसे बाढ़ आ गई है और देश की जनता को गुमराह करने की पूरी
कोशिश होती है । न सिर्फ टी.वी. और सोशल मीडिया बल्कि प्रिंट मीडिया भी बिना
सत्यापन के कई समाचार छाप देते है और झूठा साबित होने पर एक छोटा सा संशोधन छाप कर
मामले की इतिश्री कर दी जाती है। क्या यह काफि है ।या तो वर्तमान कानून ऐसी हरकतों
पर लगाम लगाने को काफि नहीं है या फिर वर्तमान कानून का कोई खौफ नहीं आरएच गया है |
देश
की जनता सत्य आधारित समाचारों की हकदार है और गलत समाचारों से जनता को गुमराह करने
वालों के लिए एक प्रभावी आचार संहिता तथा साथ ही एक नए और कड़े कानून की आवश्यकता
है | पाठक व प्रबुद्ध वर्ग इस पर सामूहिक व व्यापक चर्चा कर प्रयास करे तो आम जनता
को मानसिक यातना से राहत मिल सकती है |