Thursday, 11 February 2016

वीर हनुमंथप्पा अमर रहे

सैनिकों की जिंदगी भी क्या जिंदगी है | साहस ,पराक्रम,वीरता ,बहादुरी ,शौर्य से भरी हुयी | हमेशा मुस्तेद ,तैयार,यस सर की मुद्रा में | रेगिस्तान की धुल भरी आंधी हो या समुद्र किनारे के तूफ़ान या फिर सियाचिन का बर्फानी वातावरण ,सभी तरह के माहौल में फिट होने वाला व्यक्ति यदि देश में है तो वो है भारतीय सेना का जवान|
लांस नायक हनुमंथप्पा का 3 फरवरी 2016 को सियाचिन इलाके में 25 फुट गहरी बर्फ में 5 दिन दबे रहने के बाद जीवित निकलना एक चमत्कार ही था | जो टीम ढूंढने का काम कर रही थी ,उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ जब इनकी सांसे चलती देख कर | बर्फ के अन्दर से निकालने के तुरंत बाद उपचार और फिर आर्मी के बेस हॉस्पिटल तथा वाहन से आर्मी के दिल्ली हॉस्पिटल में गहन उपचार के बावजूद हनुमंथप्पा ने 11 फरवरी को अंतिम साँस ली | पुरे देश में जगह जगह लोगों की प्रार्थना ,दुआ ,हवन आदि हुए | ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था और हनुमंथप्पा को हमसे छीन लिया |
 कभी कभी लगता है ईश्वर भी क्रूर तो नहीं | कभी व्यक्ति को बचाता है तो कभी अपने पास बुला लेता है | इसलिए कहा गया है कि होत वही जो राम रखी राखा,नियति और प्रकृति को आज तक कोई पहुँच नहीं पाया |
हम सभी दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते है |    

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