Tuesday, 2 August 2016

सत्यमेव जयते

सत्यमेव  जयते 


हिंदुस्तान में अगर आप नियमित अख़बार पढ़तें हों ,टी वी पर समाचार सुनते हो,सोशल मीडिया में थोडा बहुत फेसबुक ट्विटर व्हाट्स अप के मुखातिब होते हों तो ऐसा लगेगा कि देश में चारों तरफ अपराध ही अपराध हो रहे है,जनता लाचार है और सरकारी मशीनरी निष्क्रिय है |
समाचार बनाने वालों की फैक्ट्री चल निकली है और लोगों को चटपटी सनसनीखेज समाचारों को पढने सुनने की आदत डाली जा रही है | हालात यहाँ तक पहुंचे है कि पाठकों व दर्शकों के लिए नित नयी कहानी प्रस्तुत करने की होड़ लग गयी है | इस धक्कम पेल में क्या सही है और क्या गलत है यह पता ही नहीं चलता है |
एक ही खबर को अलग अलग एजेंसियां अलग अलग तरीके से पेश कर रही है | कभी कभी तो एक की समाचार को अलग अलग अख़बार ऐसे छापते है कि समाचार का अर्थ एकदम उल्टा लगने लगता है |
जनता असमंजस में रहती है कि यह हो क्या रहा है ? कश्मीर के “बुरहान वाली” के समाचार पढ़ें तो कोई अख़बार उसे लश्कर ऐ तौबा का खूंखार आतंकवादी बता रहा है तो कोई उसे शरीफ मासूम लड़का बताता है |कोई उसके जनाजे में ढाई लाख लोगों के शामिल होने का दावा करते है तो कोई दस हजार लोगों के शामिल होने की बात करते है | किसे सही माने और किसे गलत |
ऐसे ही जब कोई घटना एक प्रदेश में होती है तो सत्ताधारी पक्ष एक बात करता है तो विपक्ष वाले उसमे नमक मिर्च मिला के लगी हुई आग में घी डालने का काम करते है |
प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसे सत्ता पक्ष की नीतियों की आलोचना करने का पूरा अधिकार है | परन्तु हाल ही में हुए उना गुजरात में दलितों की पिटायी का मामला हो या बुलंदशहर उत्तर प्रदेश में बलात्कार व लूट का मामला,राजनैतिक दलों के प्रवक्ता ऐसे भाषण देने लगते है जैसे उस राज्य में जहाँ उनका दल सत्ता में है वहां तो पूरा राम राज्य ही है और वहां पूर्णतया परम शांति है |

भारत जैसे विशाल देश में कहीं न कहीं कुछ तो होगा ही, परन्तु तिल का ताड़ बनाने की कला में हमारा मीडिया और हमारे कुछ नेता पारंगत है ,इसमें किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए | हरियाणा के गुरु ग्राम ( गुड गाँव ) में भारी बारिश की वजह से चंद घंटों के लिए ट्रैफिक जाम लगा तब मीडिया रिपोर्टिंग और नेताओं की बयानबाज़ी ऐसी हो रही थी जैसे बड़ा भारी राष्ट्रिय संकट पैदा हो गया हो |मजे की बात यह रही कि उसी अंतराल में बिहार,उत्तर प्रदेश में गाँव के गाँव बाढ़ की चपेट में आ रहे थे और जान माल की हानि हो रही थी उसकी सुध लेने की किसी को नहीं पड़ी थी | सभी गुरु ग्राम की ड्रेनेज व्यवस्था का बारीकी से विश्लेषण कर रहे थे | लगभग इसी समय अमेरिका और चीन जैसे देशों में भी बाढ़ का तांडव हो रहा था | सड़कों पर जाम था और कारें व अन्य वाहन बाढ़ के पानी में बह कर जा रहे थे |  प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए अमेरिका जैसा विकसित देश लाचार हो सकता है तो हरियाणा जैसा छोटा प्रान्त क्या कर सकता है ? इस विषय पर विचार करने वाला न तो कोई राजनेता था न कोई संवाद दाता |
कुल मिला कर ऐसा लगता है कि सत्य का कोई नामों निशान नहीं है |चंद लोग जो सत्य का आचरण करते है वो मानों अल्प संख्यक हो गए हो |
ध्यान देने वाली बात यह है कि “सत्यमेव जयते भारत का 'राष्ट्रीय आदर्श वाक्य' है, जिसका अर्थ है- "सत्य की सदैव ही विजय होती है"। यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अंकित है।  'सत्य की सदैव विजय हो' का विपरीत होगा- 'असत्य की पराजय हो' राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, जिन्हें सत्य का सबसे बड़ा व्यवहारवादी उपासक माना जाता है, उन्होंने सत्य को ईश्वर का पर्यायवाची कहा। गाँधीजी ने कहा था कि- "सत्य ही ईश्वर है एवं ईश्वर ही सत्य है।" सत्य अगर धर्म है तो असत्य अधर्म का प्रतीक है। 
भारत सरकार के राजकीय चिह्न 'अशोक चक्र' के नीचे लिखा 'सत्यमेव जयते' हर भारतीय को अहसास दिलाता है कि सत्य हमारे लिये एक तथ्य नहीं वरन् हमारी संस्कृति का सार है। 
परन्तु रात दिन गांधीजी के नाम का गुणगान करने वाले राजनैतिक दल के लोग जहाँ उनकी पार्टी सत्ता में है वहां घटित दलितों व महिलाओं  पर अत्याचार की घटनाओं को नजर अंदाज कर दूसरे राज्यों में घटने वाली घटनाओं पर लम्बे लम्बे भाषण देते है ,रेलियाँ निकलते है ,धरना देते है और आग को भड़काने का काम करते है ताकि उनका वोट बैंक तैयार हो जाये | ये लोग इन सब कामों से समाज को व देश को होने वाले नुक्सान की रत्ती भर भी चिंता नहीं करते है |

आवश्यकता इस बात की है कि सत्य आधारित व तथ्य आधारित समाचारों पर सटीक बयानबाज़ी व बहस हो और भारत की भोली भाली जनता को गुमराह करने का काम राजनेता और मिडिया बंद करें |

करुणा शंकर ओझा 
email: ks_ojhaji@yahoo.com

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