Wednesday, 21 September 2016

बहुत हो चुका

 जब से कश्मीर के "उरी" के आतंकी हमले मे देश के 17 जवानों ने बलिदान दिया है तब से ही पूरे देश मे लोगों मे आक्रोश और गुस्सा फूट पड़ा है | कहीं जुलूस तो, कहीं सभाए, कहीं पाकिस्तान को गालियां तो कहीं मोदीजी को भला बुरा कहना | टी वी चेनल मोदीजी के पुराने विडियो क्लिप बार बार बता कर कटाक्ष करने मे नहीं चूकते |

बहुत लोग चाहते है की पाकिस्तान को तुरंत जवाब दिया जाए, हालांकि सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है की माकूल जवाब दिया जाएगा, परंतु जवाब का समय व स्थान सेना तय करेगी | मोदी सरकार की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि अपराधियों को सजा दी जाएगी और जवानों पर हमला करवाने वालों को बक्षा नहीं जाएगा। फिर भी जनता तो जनार्दन होती है और गुस्सा उफान पकड़ता जा रहा है |

यह साधारण सी बात है की अगर कुछ करना है इसका अर्थ हुआ पाकिस्तान से युद्ध करना  |  कुछ लोग सलाह दे रहे है की केवल आतंकी ठिकानों पर हमला करके उन्हे तबाह किया जाए| कुछ लोग इसके साथ ही  पाकिस्तान पर आर्थिक पाबंदी, भारत से बहने वाली नदियों से पाकिस्तान मे जाने वाले पानी को रोकना और कुछ लोग तो पाकिस्तानी कलाकारों,गायकों ,खिलाड़ियों को भारत से निकाल बाहर करने कि सलाह दे रहे है |
एक महत्वपूर्ण सुझाव आया है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग किया जाए |
कुल मिला कर एक बात तो स्पष्ट है कि सेना की इच्छा शक्ति मे कोई कमी नहीं है, न ही सरकार की इच्छा शक्ति मे | संयोगवश पाकिस्तान के मुक़ाबले हम सैन्य शक्ति तथा आर्थिक रूप से भी मजबूत है |

अब ऐसी परिस्थितियों मे यदि आतंकी ठिकानों पर हमला बोला जाता है तो वह युद्ध मे परिवर्तित होना ही है |इससे पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को आड़े हाथों लेने का मौका मिल जाएगा और पाकिस्तान को अलग थलग करने की दिशा मे बहुत बड़ी रुकावट आ जाएगी | अब अगर युद्ध होता है तो उसके परिणाम के लिए भी हमे तैयार रहना चाहिए|

पाकिस्तान से भारत के युद्ध मे चीन का क्या रुख रहेगा, इस बारे मे सोचने की जरूरत है, क्योंकि हम जिसे जम्मू और कश्मीर कहते है उसमे से उत्तर पूर्व मे "अकसाई चीन" पर चीन का ही कब्जा है ,उत्तर मे "काराकोरम" की पहाड़ियों वाले क्षेत्र पर भी चीन का कब्जा है | पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर(पी॰ ओ॰ के॰ ) के एकदम उत्तरी छोर से पाकिस्तान के दक्षिण के बलूचिस्तान मे स्थित "ग्वादार बन्दरगाह" तक हजारों किलोमीटर की सड़क परियोजना पर काम चल रहा है ,इस सड़क को चार या छ वाहन चलाने जितना चौड़ा "हाइ वे" के रूप मे विकसित किया जा रहा है, इस सड़क से इस्लामाबाद ,लाहोर,फ़ैसलाबाद,मुल्तान,करांची जैसे प्रमुख शहर जुड़ेंगे | साथ ही इसी मार्ग से लगते हुये क्षेत्र पर रेल लाईन बिछाने का काम भी गति पकड़ रहा है |

यह पूरी परियोजना "चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडॉर"(सी॰ पी॰ ई ॰सी॰ )  के नाम से जानी जाती है | इस पूरे प्रोजेक्ट पर चीन ने लाखों करोड़ डॉलर लगाए है | इसका मकसद है कि चीन से मिडिल ईस्ट के देशों ,अफ्रीका और यूरोप के देशों को निर्यात करने वाले माल की ढुलाई का काम तीव्र व कम लागत मे हो | फिलहाल इन देशों मे माल भेजने के लिए चीन को बंगाल की खाड़ी होते हुये ,हिन्द महा सागर और अरब सागर होते हुटे समुद्री मार्ग से माल की ढुलाई करनी पड़ रही रही है ,यह रास्ता लंबा होने से माल पहुँचने मे कई दिन लग जाते है और ढुलाई पर खर्च भी बहुत ज्यादा आता है | इस नए कॉरीडोर से समय व खर्च मे भारी कमी आएगी | दूसरे शब्दों मे पाकिस्तान और पी ॰ओ ॰के॰ को चीन अपने देश के किसी राज्य के रूप मे इस्तेमाल कर रहा है |पूरे पाकिस्तान मे व पी॰ ओ ॰के॰ मे चीन के प्रतिनिधियों और यहाँ तक कि सैनिकों का बेरोकटोक आवागमन हो रहा है |

इन परिस्थितियों मे जब भी भारत पाकिस्तान पर हमला करेगा तो चीन तो निश्चित रूप से पाकिस्तान का ही साथ देगा, क्योंकि चीन की आर्थिक स्थिति के लिए पी॰ ओ॰ के॰ के "खूंजेराब" से बलूचिस्तान मे "ग्वादार बन्दरगाह" तक के कॉरीडोर का बड़ा हाथ है | चूंकि यह कॉरीडोर पी॰ ओ॰ के॰ से गुजरता है इसलिए चीन कभी नहीं चाहेगा की पी॰ ओ॰ के ॰या पाकिस्तान के किसी भी भाग पर अन्य किसी देश का दखल या कब्जा हो |
दूसरे शब्दो मे पाकिस्तान से युद्ध का मतलब सीधे सीधे चीन से युद्ध है | चीन परोक्ष रूप से भले ही युद्ध न करें परंतु पाकिस्तान को सैन्य सामग्री ,हथियार ,टैंक, बम वर्षक हवाई जहाज और आर्थिक मदद जरूर करेगा |
इसलिए पाकिस्तान से सीधे युद्ध मे कूद पड़ने कि बजाय पूरी तैयारी और सूझबूझ से कदम रखना होगा |
पाकिस्तान को सबक सिखाना अत्यंत जरूरी है परंतु जल्दबाज़ी मे जीती हुई बाज़ी हमे हारना नहीं है |

करुणा शंकर ओझा
email: ks_ojhaji@yahoo.com        

Tuesday, 20 September 2016

War or Peace with Pakistan

कश्मीर के "उरी" की घटना के बाद चारों तरफ शोर हो रहा है कि भारत को पाकिस्तान पर तुरंत आक्रमण करके मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए तभी सेना के जवानों का मनोबल बढ़ेगा |
युद्ध शुरू करना सरल है परन्तू उसे समेटना इतना आसान नहीं है | युद्ध मे हमारे जवानों को भी मौत के मुंह मे ढ्केलने जैसा होगा | हम हज़ार मारेंगे तो वो भी हमारे 100-200 जवानों को तो मारेंगे ही | 
इससे अच्छा यह है कि पाकिस्तान मे स्थित आतंकवादी ट्रेनिंग केम्प को निशाना बनाया जाय,जहां से हमारे ऊपर हमले की उत्पत्ति होती है |
दूसरा हाफिज़, मसूद और शालाडुदीन जैसे सरगनाओं को उनके ठिकानों पर तबाह किया जाय |
तीसरा,कश्मीर मे रहने वाले उनलोगों से निपटा जाय जो पाकिस्तानी आतंकवादी को पनाह देने,उनकी सार संभाल लेने और उनको गुप्त सूचना पहुंचाने का काम कर रहे है| इन लोगों को गिरफ्तार करके कश्मीर की जेलों मे रखने की बजाय अंडमान निकोबार की जेलों मे कम से कम दो वर्ष तक रखा जाए |
पाकिस्तान की सीमा पर उनकी फौज से आमने सामने लड़ाई का कोई परिणाम नहीं मिलने वाला है , इससे हमारे जान माल की हानि अधिक होने वाली है |


करुणा शंकर ओझा
email: ks_ojhaji@yahoo.com

War or Peace with Pakistan

कश्मीर के "उरी" की घटना के बाद चारों तरफ शोर हो रहा है कि भारत को पाकिस्तान पर तुरंत आक्रमण करके मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए तभी सेना के जवानों का मनोबल बढ़ेगा |
युद्ध शुरू करना सरल है परन्तू उसे समेटना इतना आसान नहीं है | युद्ध मे हमारे जवानों को भी मौत के मुंह मे ढ्केलने जैसा होगा | हम हज़ार मारेंगे तो वो भी हमारे 100-200 जवानों को तो मारेंगे ही | 
इससे अच्छा यह है कि पाकिस्तान मे स्थित आतंकवादी ट्रेनिंग केम्प को निशाना बनाया जाय,जहां से हमारे ऊपर हमले की उत्पत्ति होती है |
दूसरा हाफिज़, मसूद और शालाडुदीन जैसे सरगनाओं को उनके ठिकानों पर तबाह किया जाय |
तीसरा,कश्मीर मे रहने वाले उनलोगों से निपटा जाय जो पाकिस्तानी आतंकवादी को पनाह देने,उनकी सार संभाल लेने और उनको गुप्त सूचना पहुंचाने का काम कर रहे है| इन लोगों को गिरफ्तार करके कश्मीर की जेलों मे रखने की बजाय अंडमान निकोबार की जेलों मे कम से कम दो वर्ष तक रखा जाए |
पाकिस्तान की सीमा पर उनकी फौज से आमने सामने लड़ाई का कोई परिणाम नहीं मिलने वाला है , इससे हमारे जान माल की हानि अधिक होने वाली है |


करुणा शंकर ओझा
email: ks_ojhaji@yahoo.com

Monday, 19 September 2016

जन्नत से जहन्नुम तक - कौन है इसे बदसूरत करने वाले

फिल्म आरज़ू जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों की शूटिंग 1950 से 1980 तक कश्मीर की वादियों में हुआ करती थी | कश्मीर की वादी और उसकी खूबसूरती को लेकर अनेक मधुर फिल्मी गीत लिखे गए ,गाये गए और फिल्माए गए | ये सारे गीत इतने रोमांटिक है कि अब भी हर उम्र का व्यक्ति यदा कदा गुन गुनाता है |जन्नत जैसी खूबसूरती को भला कौन नहीं देखना और महसूस करना चाहेगा |
1990 आते आते दहशत की आग लगने लगी और फिल्मों की शूटिंग ,डल झील के शिकारों और हाउस बोट में सैलानियों की संख्या नहीं के बराबर होने लगी | कौन जाएगा मरने वहाँ या यूं कहिए मौज मस्ती करने की बजाय डरा डरा सैलानी अपने को और अपने परिवार को खतरे मे क्यों डालेगा ?
2011 के जून के महीने में मैं व मेरी पत्नी हिम्मत करके श्रीनगर पहुँच गए | हवाई अड्डे पर उतरे तो लगा की यात्रियों से ज्यादा तो सुरक्षा कर्मी थे वहाँ | गीलानी भी हमारी फ्लाइट में ही दिल्ली से श्रीनगर आए थे उस दिन | मैंने सोचा शायद इस नेता की वजह से ऐसा नज़ारा है | परंतु हवाई अड्डे के बाहर आते ही सड़क पर भी थोड़े थोड़े फासले पर सुरक्षा कर्मी नज़र आए | बख्तर बंद गाडियाँ यहाँ वहाँ दौड़ती नज़र आई |

डल झील वीरान सी ,होटल मे 200-250 की क्षमता के सामने बमुसकिल 10-15 यात्री | मुग़ल गार्डेन्स ,झरना व अन्य दृशनीय स्थल पर जाने से पहले रास्ते में ही जगह जगह चेकिंग और सुरक्षा कर्मी | स्थानीय बाज़ार ग्राहक के इंतज़ार में ,दूकानदारों का अच्छा बर्ताव ,खुल कर बात ,सामान्य स्थिति के इंतज़ार में | शिकारे वाले भी खुश मिजाज और यात्री मिला तो जैसे लॉटरी खुली ऐसी खुशी | होटल मालिक और स्टाफ सभी यात्रियों की दिल से प्यार से सेवा के लिए तत्पर | हम जैसे शाकाहारी यात्रियों के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था | लाल चौक पर हमारा गाइड दीवारों पर लगे गोलियों के निशान हमे दिखाते हुये हमसे भी ज्यादा दुखी |  डल झील पर स्थानीय नागरिकों से बातचीत में भी कहीं भी दुर्भावना जैसी बात नहीं | कैसा लगता है कश्मीर आपको के उत्तर में बहुत अच्छा सुनने पर अत्यंत खुश | लंबे चौड़े नागरिकों ने राह चलते हुये भी हम लोगों के साथ फोटो खिंचाने पर कोई परहेज नहीं |
अब 2016 में जो चित्र नज़र आ रहा है या यह कहिए मीडिया दिखा रहा है उस पर विस्वास नहीं होता |
चंद अलगाव वादी कश्मीर नहीं है ,चंद पत्थर फेकने वाले पूरा कश्मीर नहीं है | बस इन अलगाव वादियों और इसी किस्म के राजनेताओं से घाटी को मुक्त करा दो ।कश्मीर की घाटी जन्नत के रूप में नज़र आने लगेगी |
कश्मीर का सामान्य नागरिक,व्यापारी,विद्यार्थी,महिलाएं ,मजदूर और शिकारे ,हाउस बोट वाले उस समय का इंतज़ार कर रहे है जब घाटी को इन अलगाव वादियों से मुक्ति मिलेगी |
धरती पर स्वर्ग को जहन्नुम बनाने वालों की पहचान हो चुकी है ,सिर्फ उन्हे वहाँ से हटाना है |
करुणा शंकर ओझा
email: ks_ojha@yahoo.com