जब से कश्मीर के "उरी" के आतंकी हमले मे देश के 17 जवानों ने बलिदान दिया है तब से ही पूरे देश मे लोगों मे आक्रोश और गुस्सा फूट पड़ा है | कहीं जुलूस तो, कहीं सभाए, कहीं पाकिस्तान को गालियां तो कहीं मोदीजी को भला बुरा कहना | टी वी चेनल मोदीजी के पुराने विडियो क्लिप बार बार बता कर कटाक्ष करने मे नहीं चूकते |
बहुत लोग चाहते है की पाकिस्तान को तुरंत जवाब दिया जाए, हालांकि सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है की माकूल जवाब दिया जाएगा, परंतु जवाब का समय व स्थान सेना तय करेगी | मोदी सरकार की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि अपराधियों को सजा दी जाएगी और जवानों पर हमला करवाने वालों को बक्षा नहीं जाएगा। फिर भी जनता तो जनार्दन होती है और गुस्सा उफान पकड़ता जा रहा है |
यह साधारण सी बात है की अगर कुछ करना है इसका अर्थ हुआ पाकिस्तान से युद्ध करना | कुछ लोग सलाह दे रहे है की केवल आतंकी ठिकानों पर हमला करके उन्हे तबाह किया जाए| कुछ लोग इसके साथ ही पाकिस्तान पर आर्थिक पाबंदी, भारत से बहने वाली नदियों से पाकिस्तान मे जाने वाले पानी को रोकना और कुछ लोग तो पाकिस्तानी कलाकारों,गायकों ,खिलाड़ियों को भारत से निकाल बाहर करने कि सलाह दे रहे है |
एक महत्वपूर्ण सुझाव आया है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग किया जाए |
कुल मिला कर एक बात तो स्पष्ट है कि सेना की इच्छा शक्ति मे कोई कमी नहीं है, न ही सरकार की इच्छा शक्ति मे | संयोगवश पाकिस्तान के मुक़ाबले हम सैन्य शक्ति तथा आर्थिक रूप से भी मजबूत है |
अब ऐसी परिस्थितियों मे यदि आतंकी ठिकानों पर हमला बोला जाता है तो वह युद्ध मे परिवर्तित होना ही है |इससे पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को आड़े हाथों लेने का मौका मिल जाएगा और पाकिस्तान को अलग थलग करने की दिशा मे बहुत बड़ी रुकावट आ जाएगी | अब अगर युद्ध होता है तो उसके परिणाम के लिए भी हमे तैयार रहना चाहिए|
पाकिस्तान से भारत के युद्ध मे चीन का क्या रुख रहेगा, इस बारे मे सोचने की जरूरत है, क्योंकि हम जिसे जम्मू और कश्मीर कहते है उसमे से उत्तर पूर्व मे "अकसाई चीन" पर चीन का ही कब्जा है ,उत्तर मे "काराकोरम" की पहाड़ियों वाले क्षेत्र पर भी चीन का कब्जा है | पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर(पी॰ ओ॰ के॰ ) के एकदम उत्तरी छोर से पाकिस्तान के दक्षिण के बलूचिस्तान मे स्थित "ग्वादार बन्दरगाह" तक हजारों किलोमीटर की सड़क परियोजना पर काम चल रहा है ,इस सड़क को चार या छ वाहन चलाने जितना चौड़ा "हाइ वे" के रूप मे विकसित किया जा रहा है, इस सड़क से इस्लामाबाद ,लाहोर,फ़ैसलाबाद,मुल्तान,करांची जैसे प्रमुख शहर जुड़ेंगे | साथ ही इसी मार्ग से लगते हुये क्षेत्र पर रेल लाईन बिछाने का काम भी गति पकड़ रहा है |
यह पूरी परियोजना "चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडॉर"(सी॰ पी॰ ई ॰सी॰ ) के नाम से जानी जाती है | इस पूरे प्रोजेक्ट पर चीन ने लाखों करोड़ डॉलर लगाए है | इसका मकसद है कि चीन से मिडिल ईस्ट के देशों ,अफ्रीका और यूरोप के देशों को निर्यात करने वाले माल की ढुलाई का काम तीव्र व कम लागत मे हो | फिलहाल इन देशों मे माल भेजने के लिए चीन को बंगाल की खाड़ी होते हुये ,हिन्द महा सागर और अरब सागर होते हुटे समुद्री मार्ग से माल की ढुलाई करनी पड़ रही रही है ,यह रास्ता लंबा होने से माल पहुँचने मे कई दिन लग जाते है और ढुलाई पर खर्च भी बहुत ज्यादा आता है | इस नए कॉरीडोर से समय व खर्च मे भारी कमी आएगी | दूसरे शब्दों मे पाकिस्तान और पी ॰ओ ॰के॰ को चीन अपने देश के किसी राज्य के रूप मे इस्तेमाल कर रहा है |पूरे पाकिस्तान मे व पी॰ ओ ॰के॰ मे चीन के प्रतिनिधियों और यहाँ तक कि सैनिकों का बेरोकटोक आवागमन हो रहा है |
इन परिस्थितियों मे जब भी भारत पाकिस्तान पर हमला करेगा तो चीन तो निश्चित रूप से पाकिस्तान का ही साथ देगा, क्योंकि चीन की आर्थिक स्थिति के लिए पी॰ ओ॰ के॰ के "खूंजेराब" से बलूचिस्तान मे "ग्वादार बन्दरगाह" तक के कॉरीडोर का बड़ा हाथ है | चूंकि यह कॉरीडोर पी॰ ओ॰ के॰ से गुजरता है इसलिए चीन कभी नहीं चाहेगा की पी॰ ओ॰ के ॰या पाकिस्तान के किसी भी भाग पर अन्य किसी देश का दखल या कब्जा हो |
दूसरे शब्दो मे पाकिस्तान से युद्ध का मतलब सीधे सीधे चीन से युद्ध है | चीन परोक्ष रूप से भले ही युद्ध न करें परंतु पाकिस्तान को सैन्य सामग्री ,हथियार ,टैंक, बम वर्षक हवाई जहाज और आर्थिक मदद जरूर करेगा |
इसलिए पाकिस्तान से सीधे युद्ध मे कूद पड़ने कि बजाय पूरी तैयारी और सूझबूझ से कदम रखना होगा |
पाकिस्तान को सबक सिखाना अत्यंत जरूरी है परंतु जल्दबाज़ी मे जीती हुई बाज़ी हमे हारना नहीं है |
करुणा शंकर ओझा
email: ks_ojhaji@yahoo.com
बहुत लोग चाहते है की पाकिस्तान को तुरंत जवाब दिया जाए, हालांकि सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है की माकूल जवाब दिया जाएगा, परंतु जवाब का समय व स्थान सेना तय करेगी | मोदी सरकार की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि अपराधियों को सजा दी जाएगी और जवानों पर हमला करवाने वालों को बक्षा नहीं जाएगा। फिर भी जनता तो जनार्दन होती है और गुस्सा उफान पकड़ता जा रहा है |
यह साधारण सी बात है की अगर कुछ करना है इसका अर्थ हुआ पाकिस्तान से युद्ध करना | कुछ लोग सलाह दे रहे है की केवल आतंकी ठिकानों पर हमला करके उन्हे तबाह किया जाए| कुछ लोग इसके साथ ही पाकिस्तान पर आर्थिक पाबंदी, भारत से बहने वाली नदियों से पाकिस्तान मे जाने वाले पानी को रोकना और कुछ लोग तो पाकिस्तानी कलाकारों,गायकों ,खिलाड़ियों को भारत से निकाल बाहर करने कि सलाह दे रहे है |
एक महत्वपूर्ण सुझाव आया है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग किया जाए |
कुल मिला कर एक बात तो स्पष्ट है कि सेना की इच्छा शक्ति मे कोई कमी नहीं है, न ही सरकार की इच्छा शक्ति मे | संयोगवश पाकिस्तान के मुक़ाबले हम सैन्य शक्ति तथा आर्थिक रूप से भी मजबूत है |
अब ऐसी परिस्थितियों मे यदि आतंकी ठिकानों पर हमला बोला जाता है तो वह युद्ध मे परिवर्तित होना ही है |इससे पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को आड़े हाथों लेने का मौका मिल जाएगा और पाकिस्तान को अलग थलग करने की दिशा मे बहुत बड़ी रुकावट आ जाएगी | अब अगर युद्ध होता है तो उसके परिणाम के लिए भी हमे तैयार रहना चाहिए|
पाकिस्तान से भारत के युद्ध मे चीन का क्या रुख रहेगा, इस बारे मे सोचने की जरूरत है, क्योंकि हम जिसे जम्मू और कश्मीर कहते है उसमे से उत्तर पूर्व मे "अकसाई चीन" पर चीन का ही कब्जा है ,उत्तर मे "काराकोरम" की पहाड़ियों वाले क्षेत्र पर भी चीन का कब्जा है | पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर(पी॰ ओ॰ के॰ ) के एकदम उत्तरी छोर से पाकिस्तान के दक्षिण के बलूचिस्तान मे स्थित "ग्वादार बन्दरगाह" तक हजारों किलोमीटर की सड़क परियोजना पर काम चल रहा है ,इस सड़क को चार या छ वाहन चलाने जितना चौड़ा "हाइ वे" के रूप मे विकसित किया जा रहा है, इस सड़क से इस्लामाबाद ,लाहोर,फ़ैसलाबाद,मुल्तान,करांची जैसे प्रमुख शहर जुड़ेंगे | साथ ही इसी मार्ग से लगते हुये क्षेत्र पर रेल लाईन बिछाने का काम भी गति पकड़ रहा है |
यह पूरी परियोजना "चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडॉर"(सी॰ पी॰ ई ॰सी॰ ) के नाम से जानी जाती है | इस पूरे प्रोजेक्ट पर चीन ने लाखों करोड़ डॉलर लगाए है | इसका मकसद है कि चीन से मिडिल ईस्ट के देशों ,अफ्रीका और यूरोप के देशों को निर्यात करने वाले माल की ढुलाई का काम तीव्र व कम लागत मे हो | फिलहाल इन देशों मे माल भेजने के लिए चीन को बंगाल की खाड़ी होते हुये ,हिन्द महा सागर और अरब सागर होते हुटे समुद्री मार्ग से माल की ढुलाई करनी पड़ रही रही है ,यह रास्ता लंबा होने से माल पहुँचने मे कई दिन लग जाते है और ढुलाई पर खर्च भी बहुत ज्यादा आता है | इस नए कॉरीडोर से समय व खर्च मे भारी कमी आएगी | दूसरे शब्दों मे पाकिस्तान और पी ॰ओ ॰के॰ को चीन अपने देश के किसी राज्य के रूप मे इस्तेमाल कर रहा है |पूरे पाकिस्तान मे व पी॰ ओ ॰के॰ मे चीन के प्रतिनिधियों और यहाँ तक कि सैनिकों का बेरोकटोक आवागमन हो रहा है |
इन परिस्थितियों मे जब भी भारत पाकिस्तान पर हमला करेगा तो चीन तो निश्चित रूप से पाकिस्तान का ही साथ देगा, क्योंकि चीन की आर्थिक स्थिति के लिए पी॰ ओ॰ के॰ के "खूंजेराब" से बलूचिस्तान मे "ग्वादार बन्दरगाह" तक के कॉरीडोर का बड़ा हाथ है | चूंकि यह कॉरीडोर पी॰ ओ॰ के॰ से गुजरता है इसलिए चीन कभी नहीं चाहेगा की पी॰ ओ॰ के ॰या पाकिस्तान के किसी भी भाग पर अन्य किसी देश का दखल या कब्जा हो |
दूसरे शब्दो मे पाकिस्तान से युद्ध का मतलब सीधे सीधे चीन से युद्ध है | चीन परोक्ष रूप से भले ही युद्ध न करें परंतु पाकिस्तान को सैन्य सामग्री ,हथियार ,टैंक, बम वर्षक हवाई जहाज और आर्थिक मदद जरूर करेगा |
इसलिए पाकिस्तान से सीधे युद्ध मे कूद पड़ने कि बजाय पूरी तैयारी और सूझबूझ से कदम रखना होगा |
पाकिस्तान को सबक सिखाना अत्यंत जरूरी है परंतु जल्दबाज़ी मे जीती हुई बाज़ी हमे हारना नहीं है |
करुणा शंकर ओझा
email: ks_ojhaji@yahoo.com
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